वाराणसी
काशी — भगवान शिव की नगरी, माँ गंगा का पवित्र प्रवाह और भारत की सांस्कृतिक राजधानी।
आध्यात्मिकता की शाश्वत नगरी
वाराणसी पृथ्वी पर सबसे प्राचीन, निरंतर बसी नगरी है और एक भक्त के लिए यह हिंदू भारत का धड़कता हृदय है। काशी, बनारस और वाराणसी — तीन नाम इसलिए हैं क्योंकि इसमें तीन सत्य हैं: शिव का हृदय, माँ गंगा की पवित्र धारा और एक जीवंत संस्कृति जो कभी रुकी नहीं।
यहाँ की यात्रा मंदिरों की सूची नहीं है। यह भोर की नौका यात्रा है, संध्या की गंगा आरती में सात पुरोहितों का उठता दीप, काशी विश्वनाथ की संकरी गली, सारनाथ की शांति जहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया, और सर्दियों में बनारसी मलइयो का स्वाद है।
हमारी टीम यहीं रहती है। हम मंदिर की भीड़ के अनुसार दिन की योजना बनाते हैं, सुगम दर्शन की व्यवस्था करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को कभी जल्दबाज़ी न महसूस हो।
मुख्य आकर्षण
काशी विश्वनाथ मंदिर एवं कॉरिडोर
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती
गंगा पर भोर की नौका यात्रा
काल भैरव, संकट मोचन एवं अन्नपूर्णा मंदिर
सारनाथ — धमेक स्तूप एवं संग्रहालय
बनारसी रेशम बुनकर बस्तियाँ
पूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका
यात्रा का उत्तम समय
अक्टूबर से मार्च सर्वाधिक सुखद रहता है। देव दीपावली (नवंबर) एवं महाशिवरात्रि (फरवरी–मार्च) अत्यंत भव्य परंतु अत्यधिक भीड़ वाले होते हैं।
कैसे पहुँचें
वायु, रेल एवं सड़क मार्ग से सुगमता से जुड़ा है। हवाई अड्डा घाटों से 26 किमी दूर है; वाराणसी जंक्शन 4 किमी। अधिकांश यात्री दिल्ली, कोलकाता या मुंबई से रात्रि रेल से आते हैं।
- निकटतम हवाई अड्डा: Lal Bahadur Shastri International Airport (VNS), Babatpur
- निकटतम रेलवे स्टेशन: Varanasi Junction (BSB), Banaras (BSBS), Pt. Deen Dayal Upadhyaya Junction (DDU)
यात्रा पैकेज